क्लास, जहां 'क्लास' नहीं
क्लास, जहां 'क्लास' नहीं

-एक ही बेंच पर बैठते हैैं महल व फुटपाथ दोनों के बच्चे  -कोई देता पूरी फीस, कोई आधा तो कइयों के माफ - सब को शिक्षा मुहैया कराना है म...

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आधी रात के बाद सजती है रजिया की दुकान
आधी रात के बाद सजती है रजिया की दुकान

राहुल मिश्रा, कोलकाता  कहते हैैं मां का दिल सबसे कोमल होता है और अपने बच्चे की हिफाजत के लिए वह पूरी दुनिया से लड़ सकती है। यह बात आध...

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म़ूढ़ीवाले का इंसाफ का तराजू
म़ूढ़ीवाले का इंसाफ का तराजू

राहुल मिश्र रोशनी से जगमगाते महानगर में ढिबरी के सहारे दुकान चलानेवाले मूढ़ीवाले चाचा के हम कायल हैं. शाम के वक्त नाश्ते के लिए जब दफ्त...

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