।। राहुल मिश्र।।
सिटी बस में एक युवती सवार होती है. दरवाजे की तरफ से महिलाओं के लिए आरक्षित कई खाली सीटों को छोड़ती हुई आखिर की सीट के पास आकर खड़ी होती है, जिस पर उसके पिता की उम्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे हुए हैं. लड़की उन्हें सीट छोड़ने को कहती है. बजुर्ग सज्जन सामने की सीटों की ओर निगाह डालते हुए उठ खड़े होते हैं.
सीट छोड़ रहे इस व्यक्ति के चेहरे पर जितनी विनम्रता है, उतनी ही रूखाई युवती के चेहरे पर दिख रही है. यह नजारा पीछे बैठे कई पुरुषों को नागवार गुजर रहा है, फिर भी वे चुप्पी साधे और चिढ़े हुए बैठे हैं. वे एक-दूसरे को देखते हुए मानो इशारों में पूछ रहे हों- कैसी विडंबना है यह? इतने में एक युवक फुसफुसाना शुरू कर देता है, तो उसका साथी चुप रहने की हिदायत देता है. लेकिन चुप्पी अधिक देर तक साधी नहीं जा सकी. लोगों ने ऐसे कई उदाहरण देने शुरू कर दिये. उनके मुताबिक, इन दिनों महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के कई मामले सामने आ रहे हैं और पुरुषों में इसका भय इस कदर है कि महिलाओं के आस-पास भी फटकने और कुछ बोलने से घबराने लगे हैं.
एक युवक ने हाल ही में बस में ही हुई एक घटना का विवरण देना शुरू कर दिया कि कैसे एक युवती को जब सीट नहीं दी गयी, तो उसने सीट देने से मना करनेवाले व्यक्ति पर झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिये जिसका आसपास के लोगों ने विरोध भी किया. मेट्रो में भी महिलाओं द्वारा ज्यादती किये जाने की बात लोगों ने स्वीकार की. एक बार मेट्रो में, झटका लगने के कारण एक युवक एक महिला के ऊपर गिर पड़ा. इससे आक्रोशित होकर उस महिला ने युवक को तमाचे जड़ दिये और उसका मोबाइल और पर्स छीन कर अगले स्टेशन पर उतर गयी. इस नजारे को देख कर वहां खड़े कई यात्री नाराज हो गये. ऐसे में जब एक दूसरी महिला ने उस लड़के को ताना मारते हुए कहा कि उसके साथ जो भी हुआ ठीक हुआ, तो लोगों की नाराजगी बहस से शुरू होकर आक्रोश में बदल गयी.
स्टेशन पर विरोध में लोगों ने तोड़फोड़ भी की.मुङो भी याद आया कि मेट्रो में महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात महिला पुलिस की एक अधिकारी ने कई बार पुरुषों को फंसाये जाने की बात स्वीकार की थी. साथ ही उन्होंने अपने पास आनेवाली ऐसी शिकायतें दर्ज करने की अपनी बेबसी भी बतायी थी. यह सच है कि महिलाओं पर अत्याचार होता है, उनके खिलाफ यौन व अन्य अपराध होते हैं. छेड़खानी व बलात्कार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और खास उपाय जरूरी हैं. लेकिन, चंद महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो उन्हें मिली इस कानूनी सुरक्षा और अधिकारों का दुरुपयोग भी करती हैं. वे हक याद रखती हैं, पर फर्ज भूल जाती हैं. ऐसे में बड़े-बुजुर्गो की बात याद आती है कि सिर्फ अपने अधिकार नहीं, दूसरों की इज्जत का भी ख्याल रखें.
सिटी बस में एक युवती सवार होती है. दरवाजे की तरफ से महिलाओं के लिए आरक्षित कई खाली सीटों को छोड़ती हुई आखिर की सीट के पास आकर खड़ी होती है, जिस पर उसके पिता की उम्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे हुए हैं. लड़की उन्हें सीट छोड़ने को कहती है. बजुर्ग सज्जन सामने की सीटों की ओर निगाह डालते हुए उठ खड़े होते हैं.
सीट छोड़ रहे इस व्यक्ति के चेहरे पर जितनी विनम्रता है, उतनी ही रूखाई युवती के चेहरे पर दिख रही है. यह नजारा पीछे बैठे कई पुरुषों को नागवार गुजर रहा है, फिर भी वे चुप्पी साधे और चिढ़े हुए बैठे हैं. वे एक-दूसरे को देखते हुए मानो इशारों में पूछ रहे हों- कैसी विडंबना है यह? इतने में एक युवक फुसफुसाना शुरू कर देता है, तो उसका साथी चुप रहने की हिदायत देता है. लेकिन चुप्पी अधिक देर तक साधी नहीं जा सकी. लोगों ने ऐसे कई उदाहरण देने शुरू कर दिये. उनके मुताबिक, इन दिनों महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के कई मामले सामने आ रहे हैं और पुरुषों में इसका भय इस कदर है कि महिलाओं के आस-पास भी फटकने और कुछ बोलने से घबराने लगे हैं.
एक युवक ने हाल ही में बस में ही हुई एक घटना का विवरण देना शुरू कर दिया कि कैसे एक युवती को जब सीट नहीं दी गयी, तो उसने सीट देने से मना करनेवाले व्यक्ति पर झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिये जिसका आसपास के लोगों ने विरोध भी किया. मेट्रो में भी महिलाओं द्वारा ज्यादती किये जाने की बात लोगों ने स्वीकार की. एक बार मेट्रो में, झटका लगने के कारण एक युवक एक महिला के ऊपर गिर पड़ा. इससे आक्रोशित होकर उस महिला ने युवक को तमाचे जड़ दिये और उसका मोबाइल और पर्स छीन कर अगले स्टेशन पर उतर गयी. इस नजारे को देख कर वहां खड़े कई यात्री नाराज हो गये. ऐसे में जब एक दूसरी महिला ने उस लड़के को ताना मारते हुए कहा कि उसके साथ जो भी हुआ ठीक हुआ, तो लोगों की नाराजगी बहस से शुरू होकर आक्रोश में बदल गयी.
स्टेशन पर विरोध में लोगों ने तोड़फोड़ भी की.मुङो भी याद आया कि मेट्रो में महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात महिला पुलिस की एक अधिकारी ने कई बार पुरुषों को फंसाये जाने की बात स्वीकार की थी. साथ ही उन्होंने अपने पास आनेवाली ऐसी शिकायतें दर्ज करने की अपनी बेबसी भी बतायी थी. यह सच है कि महिलाओं पर अत्याचार होता है, उनके खिलाफ यौन व अन्य अपराध होते हैं. छेड़खानी व बलात्कार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और खास उपाय जरूरी हैं. लेकिन, चंद महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो उन्हें मिली इस कानूनी सुरक्षा और अधिकारों का दुरुपयोग भी करती हैं. वे हक याद रखती हैं, पर फर्ज भूल जाती हैं. ऐसे में बड़े-बुजुर्गो की बात याद आती है कि सिर्फ अपने अधिकार नहीं, दूसरों की इज्जत का भी ख्याल रखें.